नक्षत्र
पुष्य नक्षत्र
पुष्य सबसे शुभ नक्षत्र माना जाता है: पोषक, रक्षक, अनुशासित और भक्तिपूर्ण।
| विस्तार | कर्क 3° 20′ – कर्क 16° 40′ |
|---|---|
| स्वामी ग्रह | शनि |
| देवता | बृहस्पति |
| प्रतीक | पुष्प या थन |
| गण | देव |
| योनि (पशु) | मेष (भेड़) |
| नाड़ी | मध्य (पित्त) |
| राशि | कर्क |
| रत्न (स्वामी का) | नीलम |
पुष्य का स्वभाव
पुष्य सबसे शुभ नक्षत्र माना जाता है: पोषक, रक्षक, अनुशासित और भक्तिपूर्ण। इसके जातक ज़िम्मेदार, देखभाल करने वाले और आध्यात्मिक होते हैं, और अक्सर परिवार व समाज की देखभाल करते हैं।
इसका स्वामी शनि अनुशासन, करियर, सहनशक्ति और आयु का कारक है, और यहाँ चंद्रमा वाले जातकों की पहली दशा इसी की होती है।
चारों पद
- पद 1 · कर्क 3° 20′ – कर्क 6° 40′ · सिंह नवांश · नामाक्षर: हू
- पद 2 · कर्क 6° 40′ – कर्क 10° · कन्या नवांश · नामाक्षर: हे
- पद 3 · कर्क 10° – कर्क 13° 20′ · तुला नवांश · नामाक्षर: हो
- पद 4 · कर्क 13° 20′ – कर्क 16° 40′ · वृश्चिक नवांश · नामाक्षर: डा
अनुकूलता
गुण मिलान के अनुसार सबसे अनुकूल नक्षत्र हैं अश्विनी, आश्लेषा, हस्त, स्वाति, और रेवती।
सबसे कम अनुकूल हैं चित्रा, पूर्वाषाढ़ा, और धनिष्ठा।
मध्य पदों के लिए 36 गुण के अष्टकूट से निकाला गया; आपके सटीक पद और पूरी कुंडली इसे बदल सकते हैं।
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शिशु नाम